📘 MJ-4 Commerce Set-1 | SKMU Dumka UG Semester-3 (2024–28)
🎓 यदि आप सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (SKMU), दुमका के UG Semester-3 (Session 2024–28) के MJ-4 Commerce विषय की तैयारी कर रहे हैं, तो यह Set-1 Practice Set आपके लिए बेहद उपयोगी है। यह प्रैक्टिस सेट नवीनतम सिलेबस के अनुसार तैयार किया गया है, ताकि विद्यार्थी परीक्षा की सही तैयारी कर सकें। इसमें शामिल प्रश्न पूरी तरह Exam Oriented हैं और महत्वपूर्ण टॉपिक्स को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
⭐ ऐसे Practice Sets का नियमित अभ्यास करने से विषय की समझ बेहतर होती है, महत्वपूर्ण प्रश्नों की तैयारी मजबूत होती है और परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ उत्तर लिखने में सहायता मिलती है। यदि आप Semester-3 परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो इस सेट का अभ्यास अवश्य करें।
✅ इस पोस्ट में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दिए गए हैं, जिससे आपको विषय को समझने में आसानी होगी।
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SKMU UG SEM-3 (2024-28)
MJ-4 : COMMERCE
SET-1 : QUESTION ANSWER
Group - A
( Very Short Answer Type Questions )
1. Answer the following questions : (1×5=5)
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।)
a. What is Business Ethics?
(व्यावसायिक नैतिकता क्या है?)
b. Define Scientific Management.
(वैज्ञानिक प्रबंधन की परिभाषा दीजिए।)
c. What is Management by Objectives (MBO)?
(उद्देश्यों द्वारा प्रबंधन (MBO) क्या है?)
d. What is Leadership?
(नेतृत्व क्या है?)
e. What is Formal Communication?
(औपचारिक संचार क्या है?)
( Short Answer Type Questions )
2. Explain the characteristics of a Joint Stock Company.
(संयुक्त पूँजी कंपनी की विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।)
3. Explain the barriers to effective Communication and suggest measures to overcome them.
(प्रभावी संचार में आने वाली बाधाओं की व्याख्या कीजिए तथा उन्हें दूर करने के उपाय बताइए।)
Group - B
( Long Answer Type Questions )
4. Explain Fayol's Fourteen Principles of Management in detail.
(फेयोल के प्रबंधन के चौदह सिद्धांतों की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए।)
फेयोल के चौदह सिद्धांत इस प्रकार हैं—
- कार्य का विभाजन (Division of Work): कार्य को बाँटने से दक्षता और गति बढ़ती है।
- अधिकार एवं उत्तरदायित्व (Authority and Responsibility): अधिकार के साथ उत्तरदायित्व भी होना चाहिए।
- अनुशासन (Discipline): सभी कर्मचारियों को नियमों का पालन करना चाहिए।
- आदेश की एकता (Unity of Command): प्रत्येक कर्मचारी को केवल एक अधिकारी से आदेश मिलना चाहिए।
- दिशा की एकता (Unity of Direction): समान उद्देश्य वाले कार्यों का एक ही योजना के अनुसार संचालन होना चाहिए।
- व्यक्तिगत हित से ऊपर सामान्य हित (Subordination of Individual Interest): संगठन का हित व्यक्तिगत हित से अधिक महत्वपूर्ण है।
- उचित पारिश्रमिक (Remuneration): कर्मचारियों को उचित और न्यायपूर्ण वेतन मिलना चाहिए।
- केंद्रीकरण (Centralization): अधिकारों का उचित संतुलन आवश्यक है।
- पदानुक्रम श्रृंखला (Scalar Chain): आदेश ऊपर से नीचे तक निर्धारित क्रम में जाने चाहिए।
- व्यवस्था (Order): प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु उचित स्थान पर होनी चाहिए।
- समानता (Equity): सभी कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष और सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
- कार्यकाल की स्थिरता (Stability of Tenure): कर्मचारियों को पर्याप्त समय तक कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए।
- पहल (Initiative): कर्मचारियों को नए विचार और सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
- दल भावना (Esprit de Corps): संगठन में सहयोग, एकता और टीम भावना बनाए रखनी चाहिए।
5. Define Planning. Explain the process, characteristics and importance of Planning.
(नियोजन की परिभाषा दीजिए तथा नियोजन की प्रक्रिया, विशेषताओं एवं महत्व की व्याख्या कीजिए।)
नियोजन (Planning) प्रबंधन का सबसे पहला और महत्वपूर्ण कार्य है। किसी भी संस्था या व्यवसाय की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके कार्य पहले से कितनी अच्छी तरह योजनाबद्ध किए गए हैं। नियोजन के माध्यम से भविष्य को ध्यान में रखकर लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए उचित कार्ययोजना बनाई जाती है। इससे समय, धन और संसाधनों का सही उपयोग होता है तथा कार्य व्यवस्थित रूप से पूरे होते हैं।
नियोजन की परिभाषा:
नियोजन वह प्रक्रिया है जिसमें भविष्य के उद्देश्यों को निर्धारित किया जाता है तथा उन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए पहले से निर्णय लिया जाता है कि क्या करना है, कब करना है, कैसे करना है, कहाँ करना है और किसके द्वारा करना है।
नियोजन की प्रक्रिया:
- उद्देश्यों का निर्धारण: सबसे पहले संस्था अपने लक्ष्य निर्धारित करती है।
- जानकारी एकत्र करना: आवश्यक सूचनाएँ और तथ्यों का अध्ययन किया जाता है।
- विकल्पों का निर्माण: कार्य करने के विभिन्न उपाय तैयार किए जाते हैं।
- विकल्पों का मूल्यांकन: प्रत्येक विकल्प के लाभ और हानि का अध्ययन किया जाता है।
- सर्वश्रेष्ठ विकल्प का चयन: सबसे उपयुक्त योजना का चुनाव किया जाता है।
- योजना का क्रियान्वयन: चुनी गई योजना को लागू किया जाता है।
- समीक्षा और सुधार: परिणामों की जाँच करके आवश्यकता अनुसार सुधार किए जाते हैं।
- यह प्रबंधन का पहला कार्य है।
- यह भविष्य पर आधारित प्रक्रिया है।
- यह लक्ष्य प्राप्ति में सहायता करता है।
- इसमें पहले से निर्णय लिए जाते हैं।
- यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
- यह सभी स्तरों के प्रबंधन में आवश्यक है।
- यह संसाधनों के उचित उपयोग में सहायक है।
- यह जोखिम और अनिश्चितता को कम करता है।
- कार्यों को सही दिशा प्रदान करता है।
- संस्था के उद्देश्यों को स्पष्ट करता है।
- समय, धन और श्रम की बचत करता है।
- निर्णय लेने की प्रक्रिया को सरल बनाता है।
- जोखिम और अनिश्चितता को कम करता है।
- विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
- संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करता है।
- कार्य की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाता है।
- नियंत्रण (Controlling) को प्रभावी बनाता है।
- संस्था के विकास और सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
6. Explain the concept of Social Responsibility of Business. Discuss the role of Business Ethics in modern business.
(व्यवसाय की सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधारणा की व्याख्या कीजिए तथा आधुनिक व्यवसाय में व्यावसायिक नैतिकता की भूमिका पर चर्चा कीजिए।)
व्यवसाय का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं होता, बल्कि समाज, ग्राहकों, कर्मचारियों, सरकार तथा पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का पालन करना भी होता है। व्यवसाय द्वारा समाज के हित में किए जाने वाले कार्यों को व्यवसाय की सामाजिक उत्तरदायित्व कहा जाता है। एक अच्छा व्यवसाय गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ उपलब्ध कराता है, उचित मूल्य लेता है, रोजगार के अवसर प्रदान करता है, करों का भुगतान करता है तथा पर्यावरण की सुरक्षा का ध्यान रखता है।
व्यवसाय की सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रमुख क्षेत्र:
- ग्राहकों के प्रति उत्तरदायित्व: अच्छी गुणवत्ता की वस्तुएँ उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना तथा उपभोक्ताओं के साथ ईमानदारी से व्यवहार करना।
- कर्मचारियों के प्रति उत्तरदायित्व: उचित वेतन, सुरक्षित कार्य वातावरण, प्रशिक्षण तथा अन्य आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करना।
- सरकार के प्रति उत्तरदायित्व: सभी कानूनों का पालन करना, समय पर करों का भुगतान करना तथा सरकारी नियमों का सम्मान करना।
- समाज के प्रति उत्तरदायित्व: शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक विकास के कार्यों में योगदान देना।
- पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व: प्रदूषण को कम करना, प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करना तथा पर्यावरण की रक्षा करना।
व्यावसायिक नैतिकता का अर्थ है व्यवसाय में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता तथा नैतिक मूल्यों का पालन करना। आधुनिक व्यवसाय में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- ग्राहकों का विश्वास और संतुष्टि बढ़ती है।
- कंपनी की अच्छी छवि और प्रतिष्ठा बनती है।
- भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी तथा अनैतिक कार्यों में कमी आती है।
- कर्मचारियों में विश्वास, सहयोग और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
- निवेशकों और व्यापारिक साझेदारों का विश्वास मजबूत होता है।
- कानूनों और सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित होता है।
- समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने में सहायता मिलती है।
- व्यवसाय का दीर्घकालीन विकास और स्थिर सफलता सुनिश्चित होती है।
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलता है।
- कंपनी की साख बढ़ने से ग्राहकों और निवेशकों की संख्या में वृद्धि होती है।
7. Explain Maslow's Need Hierarchy Theory of Motivation with its merits and limitations.
(मास्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत की उसके गुण एवं सीमाओं सहित व्याख्या कीजिए।)
मास्लो के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताएँ एक निश्चित क्रम में होती हैं। जब निम्न स्तर की आवश्यकता पूरी हो जाती है, तब व्यक्ति उससे ऊपर की आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास करता है। इसलिए कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए उनकी आवश्यकताओं को समझना आवश्यक है। मास्लो ने आवश्यकताओं को पाँच स्तरों में विभाजित किया है।
मास्लो की पाँच आवश्यकताएँ:
- शारीरिक आवश्यकताएँ (Physiological Needs): ये जीवन की सबसे मूलभूत आवश्यकताएँ हैं, जैसे भोजन, पानी, वस्त्र, आवास, विश्राम और वेतन। यदि ये आवश्यकताएँ पूरी नहीं होतीं, तो व्यक्ति अन्य आवश्यकताओं पर ध्यान नहीं देता।
- सुरक्षा की आवश्यकता (Safety Needs): इस स्तर पर व्यक्ति नौकरी की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा तथा सुरक्षित कार्यस्थल चाहता है।
- सामाजिक आवश्यकता (Social Needs): मनुष्य सामाजिक प्राणी है। वह मित्रता, प्रेम, अपनापन, समूह में सम्मान तथा अच्छे संबंधों की इच्छा रखता है।
- सम्मान की आवश्यकता (Esteem Needs): इस स्तर पर व्यक्ति सम्मान, प्रतिष्ठा, आत्मविश्वास, पदोन्नति, पुरस्कार तथा दूसरों से प्रशंसा प्राप्त करना चाहता है।
- आत्म-साक्षात्कार की आवश्यकता (Self-Actualization Needs): यह सबसे उच्च स्तर की आवश्यकता है। इसमें व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता का विकास करना, नए कार्य करना, रचनात्मक बनना तथा जीवन में सर्वोच्च उपलब्धि प्राप्त करना चाहता है।
- कर्मचारियों की आवश्यकताओं को समझने में सहायता करता है।
- कर्मचारियों को प्रेरित करने का सरल और प्रभावी आधार प्रदान करता है।
- प्रबंधकों को उचित प्रेरणा देने में मदद करता है।
- कार्य संतुष्टि और कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक है।
- कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच अच्छे संबंध विकसित करता है।
- संगठन में सकारात्मक कार्य वातावरण बनाने में उपयोगी है।
- कर्मचारी की व्यक्तिगत और व्यावसायिक उन्नति को प्रोत्साहित करता है।
- आधुनिक मानव संसाधन प्रबंधन में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।
- सभी व्यक्तियों की आवश्यकताओं का क्रम एक जैसा नहीं होता।
- कई बार व्यक्ति एक साथ कई आवश्यकताओं को पूरा करना चाहता है।
- यह सिद्धांत हर देश, संस्कृति और परिस्थिति पर समान रूप से लागू नहीं होता।
- आवश्यकताओं का मापन करना कठिन होता है।
- कुछ लोग सम्मान या आत्म-संतुष्टि को आर्थिक लाभ से अधिक महत्व देते हैं।
- यह सिद्धांत व्यक्तिगत व्यवहार के सभी पहलुओं की पूरी तरह व्याख्या नहीं करता।
8. Define Communication. Explain the Communication Process with a neat diagram.
(संचार की परिभाषा दीजिए तथा संचार प्रक्रिया की उपयुक्त चित्र सहित व्याख्या कीजिए।)
संचार (Communication) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपने विचार, सूचना, भावनाएँ, संदेश या सुझाव दूसरे व्यक्ति तक इस प्रकार पहुँचाता है कि सामने वाला उन्हें सही अर्थ में समझ सके। प्रभावी संचार किसी भी संगठन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार होता है। इसके माध्यम से कर्मचारियों के बीच समन्वय, सहयोग और अच्छे संबंध स्थापित होते हैं।
संचार प्रक्रिया (Communication Process):
संचार की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है—
- प्रेषक (Sender): संचार की शुरुआत उस व्यक्ति से होती है जो संदेश भेजना चाहता है। उसे प्रेषक कहते हैं।
- संदेश (Message): प्रेषक जिस सूचना, विचार, आदेश या सुझाव को भेजना चाहता है, उसे संदेश कहते हैं।
- सांकेतिक रूप देना (Encoding): प्रेषक अपने विचारों को शब्दों, संकेतों, चित्रों या प्रतीकों के रूप में बदलता है ताकि उन्हें आसानी से समझाया जा सके।
- माध्यम (Channel): संदेश भेजने के लिए जिस साधन का उपयोग किया जाता है, उसे माध्यम कहते हैं। जैसे—पत्र, ई-मेल, मोबाइल, टेलीफोन, बैठक या मौखिक वार्ता।
- प्राप्तकर्ता (Receiver): जिस व्यक्ति के लिए संदेश भेजा जाता है, वह प्राप्तकर्ता कहलाता है।
- संदेश को समझना (Decoding): प्राप्तकर्ता संदेश को पढ़कर, सुनकर या देखकर उसका सही अर्थ समझने का प्रयास करता है।
- प्रतिपुष्टि (Feedback): प्राप्तकर्ता द्वारा दिया गया उत्तर या प्रतिक्रिया प्रतिपुष्टि कहलाती है। इससे पता चलता है कि संदेश सही प्रकार से समझा गया या नहीं।
↓
संदेश (Message)
↓
सांकेतिक रूप देना (Encoding)
↓
माध्यम (Channel)
↓
प्राप्तकर्ता (Receiver)
↓
संदेश को समझना (Decoding)
↓
प्रतिपुष्टि (Feedback)
- कर्मचारियों के बीच अच्छा समन्वय स्थापित होता है।
- गलतफहमियाँ और विवाद कम होते हैं।
- निर्णय लेने की प्रक्रिया आसान बनती है।
- कार्य की गति और गुणवत्ता में सुधार होता है।
- कर्मचारियों का मनोबल और विश्वास बढ़ता है।
- संगठन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
- प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच अच्छे संबंध विकसित होते हैं।
- कार्यों पर नियंत्रण और निगरानी आसान हो जाती है।
- सूचना का सही और समय पर आदान-प्रदान होता है।
- संगठन की कार्यक्षमता और उत्पादकता में वृद्धि होती है।
9. Define Partnership. Explain its characteristics, advantages, disadvantages and Partnership Deed.
(साझेदारी की परिभाषा दीजिए तथा इसकी विशेषताओं, लाभों, हानियों एवं साझेदारी विलेख की व्याख्या कीजिए।)
साझेदारी (Partnership) व्यवसाय का वह रूप है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति आपसी समझौते के आधार पर किसी वैध व्यवसाय को चलाते हैं तथा उसके लाभ और हानि को पूर्व निर्धारित अनुपात में बाँटते हैं। भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के अनुसार साझेदारी उन व्यक्तियों के बीच संबंध है जिन्होंने किसी व्यवसाय के लाभ को आपस में बाँटने का समझौता किया हो और जो व्यवसाय सभी या किसी एक साझेदार द्वारा सभी की ओर से चलाया जाता हो।
साझेदारी की विशेषताएँ (Characteristics of Partnership):
- साझेदारी में कम से कम दो व्यक्ति होना आवश्यक है।
- साझेदारी आपसी समझौते (Agreement) के आधार पर बनती है।
- इसका उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
- लाभ और हानि का बँटवारा पहले से तय अनुपात में होता है।
- प्रत्येक साझेदार व्यवसाय का प्रतिनिधि तथा अभिकर्ता (Agent) होता है।
- साझेदारों का दायित्व सामान्यतः असीमित होता है।
- साझेदारी में आपसी विश्वास और सहयोग का विशेष महत्व होता है।
- साझेदारी का व्यवसाय कानूनी और वैध होना चाहिए।
- स्थापना करना सरल होता है।
- अधिक पूँजी एकत्र करना संभव होता है।
- कार्य और जिम्मेदारियों का विभाजन हो जाता है।
- विभिन्न साझेदारों के ज्ञान और अनुभव का लाभ मिलता है।
- निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
- व्यवसाय का विस्तार करना अपेक्षाकृत आसान होता है।
- जोखिम और हानि सभी साझेदार मिलकर वहन करते हैं।
- साझेदारों का दायित्व असीमित होता है।
- साझेदारों के बीच मतभेद होने की संभावना रहती है।
- व्यवसाय का अस्तित्व साझेदारों पर निर्भर करता है।
- निर्णय लेने में कभी-कभी अधिक समय लगता है।
- पूँजी जुटाने की क्षमता सीमित होती है।
- एक साझेदार की गलती का प्रभाव सभी साझेदारों पर पड़ता है।
साझेदारी विलेख वह लिखित दस्तावेज है जिसमें साझेदारी से संबंधित सभी महत्वपूर्ण नियम और शर्तें लिखी जाती हैं। यह भविष्य में होने वाले विवादों को रोकने में सहायता करता है।
साझेदारी विलेख में सामान्यतः निम्नलिखित बातें लिखी जाती हैं—
- फर्म का नाम और पता।
- साझेदारों के नाम और पते।
- प्रत्येक साझेदार द्वारा लगाई गई पूँजी।
- लाभ और हानि बाँटने का अनुपात।
- साझेदारों के अधिकार और कर्तव्य।
- वेतन, कमीशन या ब्याज से संबंधित नियम।
- नए साझेदार के प्रवेश तथा पुराने साझेदार के सेवानिवृत्त होने के नियम।
- साझेदारी समाप्त करने (विघटन) की शर्तें।
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